शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन 13 अक्टूबर को मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर देशभर के मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। भक्त मां चंद्रघंटा से सुख, शांति, साहस और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर विशेष पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांति, शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मान्यता है कि मां का यह स्वरूप अपने भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति पाने की प्रेरणा देता है। मां चंद्रघंटा की उपासना से मन में आत्मविश्वास और साहस बढ़ने की धार्मिक धारणा भी प्रचलित है।
नवरात्रि के दौरान भक्त सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और विधि-विधान से मां की पूजा करते हैं। पूजा में पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में शांति की प्रार्थना करते हैं। कई घरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ और भजन-कीर्तन भी किया जाता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिरों में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। मंदिरों में आने वाले श्रद्धालु मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व और देवी उपासना की परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।
नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना और आत्मिक अनुशासन का संदेश देता है। मां चंद्रघंटा की पूजा के साथ श्रद्धालु साहस, संयम और सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।
