ओडिशा के पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हवाई अड्डे के लिए अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी और तटीय विनियमन क्षेत्र से संबंधित स्वीकृति प्रदान कर दी है। सात अक्टूबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, निर्माण शुरू करने से पहले कुछ अन्य औपचारिक स्वीकृतियां भी आवश्यक हैं। <Cite refs={[“turn352729search0″,”turn352729search7”]}/>
प्रस्तावित हवाई अड्डा पुरी जिले के सीपसारुबाली क्षेत्र में लगभग 471.35 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जाना है। यह स्थान भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध मंदिर से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर बताया गया है। परियोजना का उद्देश्य पुरी की हवाई संपर्क सुविधा को बेहतर बनाना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। <Cite refs={[“turn352729search4″,”turn352729search7”]}/>
पुरी देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। विशेष रूप से रथयात्रा के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा विकसित होने से भविष्य में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और अन्य यात्रियों को यात्रा के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5,631 करोड़ रुपये है। पहले चरण में हवाई अड्डे की वार्षिक यात्री क्षमता करीब 46 लाख यात्रियों की रखने की योजना है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इस परियोजना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। <Cite refs={[“turn352729search7”]}/>
हालांकि, परियोजना को लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों ने प्रवासी पक्षियों और समुद्री जीवों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। इसलिए निर्माण और संचालन के दौरान पर्यावरणीय शर्तों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा। <Cite refs={[“turn352729search4”]}/>
अब राज्य सरकार को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करके विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना होगा। हवाई अड्डे का निर्माण पूरा होने पर पुरी की संपर्क व्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
