नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में शिक्षकों और कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन तीसरे सप्ताह में पहुंच गया है। कॉलेज कर्मचारी संघ की ओर से शुरू किया गया यह विरोध अब केवल प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं रहा है। प्रदर्शनकारी कॉलेज के प्रशासनिक कामकाज, वित्तीय पारदर्शिता, नियुक्तियों, खरीद प्रक्रिया, छात्र कल्याण और संस्थागत व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग कर रहे हैं।
विरोध की शुरुआत 14 सितंबर को खेल और पाठ्येतर गतिविधियों के कोटे के तहत हुए प्रवेश में कथित अनियमितताओं को लेकर हुई थी। कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि कुछ पाठ्यक्रमों में निर्धारित सीमा से अधिक सीटों पर प्रवेश दिए गए। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से इन मामलों को प्रवेश प्रणाली में हुई तकनीकी त्रुटि से जोड़कर बताया गया है।
विरोध कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों ने इसके बाद कॉलेज के व्यापक प्रशासनिक संचालन से जुड़े कई मुद्दे उठाए। कर्मचारी संघ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉलेज का अस्थायी प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेने और विस्तृत जांच व्यवस्था बनाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज की शासी संस्था और प्रशासन के कामकाज की भी जांच की मांग रखी है।
एक अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय की ओर मार्च किया। कुलपति की अनुपस्थिति में प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणी परिसर की निदेशक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रवेश प्रक्रिया, प्रशासनिक पारदर्शिता और कॉलेज संसाधनों के उपयोग सहित कई मुद्दों को उठाया गया।
इससे पहले कॉलेज की शासी संस्था की ओर से कुछ शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे। कर्मचारी संघ और कॉलेज प्रशासन के बीच विवाद के बीच इन नोटिसों ने मामले को और चर्चा में ला दिया।
फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय और हिंदू कॉलेज प्रशासन की ओर से उठाई गई मांगों पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। संबंधित आरोपों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही विवाद से जुड़े तथ्यों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
