नई दिल्ली। भारत सरकार ने चीन से आयात होने वाले सजावटी कागज पर लगाए गए प्रतिपाटन शुल्क की अवधि मार्च 2027 तक बढ़ा दी है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू कागज निर्माताओं को कम कीमत पर होने वाले आयात से होने वाले संभावित नुकसान से बचाना और देश में कागज उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धी माहौल बनाए रखना है।
प्रतिपाटन शुल्क उस स्थिति में लगाया जाता है जब किसी देश से कोई उत्पाद उसके सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत पर दूसरे देश के बाजार में पहुंचता है और इससे घरेलू उद्योग को नुकसान होने की आशंका रहती है। भारत में इस तरह के शुल्क की जांच और सिफारिश संबंधित व्यापार उपचार प्राधिकरण की ओर से की जाती है, जबकि अंतिम शुल्क अधिसूचना वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी की जाती है।
सजावटी कागज का इस्तेमाल फर्नीचर, लकड़ी आधारित उत्पादों, सजावटी सतहों और आंतरिक साज-सज्जा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। चीन से इस उत्पाद के आयात को लेकर भारतीय निर्माताओं की ओर से लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। घरेलू उद्योग का तर्क रहा है कि बहुत कम कीमत वाले आयात से भारतीय निर्माताओं के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।
सरकार की ओर से शुल्क की अवधि बढ़ाने का निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत विभिन्न उत्पादों के आयात में घरेलू उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापार उपचार उपायों का इस्तेमाल कर रहा है। इन उपायों का उद्देश्य आयात पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि अनुचित मूल्य प्रतिस्पर्धा की स्थिति में घरेलू उत्पादकों को राहत देना है।
हालांकि, शुल्क बढ़ने का असर चीन से सजावटी कागज आयात करने वाले कारोबारियों और इस कच्चे माल का इस्तेमाल करने वाले कुछ उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है। इसलिए बाजार में कीमतों और आपूर्ति पर इसके प्रभाव पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
मार्च 2027 तक शुल्क जारी रहने से घरेलू निर्माताओं को अतिरिक्त सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार के सामने घरेलू उत्पादन, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमतों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बनी रहेगी।
