चंडीगढ़: पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हाल के दिनों में नशीले पदार्थों की तस्करी, पुलिस कार्रवाई, नशा मुक्ति केंद्रों में बढ़ते दाखिलों और राजनीतिक दलों के अभियानों के कारण यह विषय राज्य में लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सितंबर 2026 में नशे के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हुई हैं, जिसके बीच सरकार की कार्रवाई और नशा मुक्ति व्यवस्था को लेकर बहस जारी है।
नशे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी
पंजाब पुलिस के अनुसार, नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने 21 सितंबर को बताया कि अभियान के तहत अब तक 78,462 लोगों को नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। रविवार की कार्रवाई में भी 96 कथित तस्करों की गिरफ्तारी और विभिन्न नशीले पदार्थों की बरामदगी की जानकारी दी गई।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर पुलिस कार्रवाई को बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल में नशे के खिलाफ अभियान के अंतिम चरण में पुलिस को नशीले पदार्थ बेचने और उनकी आपूर्ति करने वालों पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए थे।
नशा मुक्ति केंद्रों में बढ़े दाखिले
नशे की समस्या से निपटने में केवल गिरफ्तारी और जब्ती ही नहीं, बल्कि उपचार और पुनर्वास भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले 2024 के 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 हो गए। यह लगभग 164 प्रतिशत की वृद्धि है। जुलाई 2026 तक 14,000 से अधिक लोग इन केंद्रों में दाखिल हो चुके थे।
सरकार इस वृद्धि को उपचार के लिए लोगों और परिवारों के आगे आने तथा नशा मुक्ति सेवाओं तक पहुंच बढ़ने से जोड़ती है। हालांकि, केवल दाखिलों की संख्या से राज्य में नशे की समस्या बढ़ी या घटी है, इसका सीधा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अधिक दाखिले बेहतर जागरूकता, उपचार की उपलब्धता और सामाजिक झिझक कम होने का परिणाम भी हो सकते हैं।
राजनीतिक दलों के अभियान से फिर गर्माया मुद्दा
नशे का मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में है। भारतीय जनता पार्टी ने सितंबर में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू की है। यह अभियान राज्य के विभिन्न हिस्सों से होकर लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला है। इसके जवाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के बीच नशे के मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं।
इस बीच पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों से जुड़े कुछ हालिया विवादों ने भी इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। संगरूर में एक व्यक्ति द्वारा जहरीला पदार्थ खाने की घटना के बाद राजनीतिक दलों ने अलग-अलग दावे किए हैं। इस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार है।
तस्करी रोकने के साथ पुनर्वास पर भी जोर
केंद्र की हालिया नशीली पदार्थ विरोधी योजना में पंजाब के संवेदनशील जिलों पर विशेष ध्यान देने की बात सामने आई है। सीमा पार से होने वाली तस्करी रोकने के लिए ड्रोन रोधी तकनीक और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की योजना भी बताई गई है। साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों के खिलाफ रोकथाम व्यवस्था मजबूत करने की योजना है।
पंजाब में नशे का मुद्दा अब पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ उपचार, पुनर्वास, सामाजिक जागरूकता और तस्करी नेटवर्क पर नियंत्रण से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में सरकारी आंकड़ों, जांच और नशा मुक्ति सेवाओं के परिणामों से यह समझने में मदद मिलेगी कि विभिन्न उपाय जमीन पर कितना प्रभाव डाल रहे हैं।
