फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यशाला के दौरान कुछ प्रतिभागियों की ओर से हिंदी भाषा के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई गई। आरोप लगाया गया कि कार्यक्रम में हिंदी को प्राथमिकता देने से दूसरी भाषाओं से आने वाली महिलाओं और प्रतिभागियों को असुविधा हुई। इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है।
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने मामले पर नाराजगी जताते हुए हिंदी थोपे जाने के कथित प्रयास को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि देश की विविध भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार महिलाओं से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना जरूरी है।
विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में भाषा और क्षेत्रीय पहचान को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है। अलग-अलग राज्यों के लोग अपनी मातृभाषा को अपनी पहचान और संस्कृति से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में किसी एक भाषा के इस्तेमाल को लेकर उठने वाला सवाल जल्दी ही राजनीतिक मुद्दा बन जाता है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, जागरूकता और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना था। लेकिन भाषा विवाद के कारण कार्यक्रम का मूल उद्देश्य कुछ हद तक पीछे छूटता दिखाई दिया।
राजनीतिक नेताओं ने कहा है कि महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर होने वाले कार्यक्रमों में भाषा को विवाद का कारण नहीं बनने देना चाहिए। भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए संवाद का ऐसा तरीका अपनाया जाना चाहिए, जिसमें अलग-अलग राज्यों से आने वाले सभी प्रतिभागी सहजता से अपनी बात रख सकें।
मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाषा के संतुलित इस्तेमाल और क्षेत्रीय भाषाओं के सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है।
