कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मानहानि के एक पुराने मामले में बंबई उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। अदालत ने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द करने की उनकी याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।
मामला वर्ष 2018 में राजस्थान में एक राजनीतिक सभा के दौरान राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि की शिकायत दर्ज की गई थी। वर्ष 2019 में मजिस्ट्रेट ने राहुल गांधी के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था।
राहुल गांधी की ओर से उच्च न्यायालय में दलील दी गई थी कि शिकायतकर्ता के पास मामला दर्ज कराने का उचित आधार नहीं था और उनकी टिप्पणी किसी स्पष्ट या पहचान योग्य समूह के खिलाफ नहीं थी। उनके वकीलों ने मामले को निराधार बताते हुए निचली अदालत की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।
बंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन. आर. बोरकर ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि भारतीय जनता पार्टी एक पंजीकृत और पहचान योग्य राजनीतिक संगठन है और मामले को प्रारंभिक स्तर पर समाप्त करने का पर्याप्त आधार मौजूद नहीं है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि नहीं पाई, जिसके आधार पर कार्यवाही रद्द की जा सके।
हालांकि, अदालत ने राहुल गांधी को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर दिया है। इस दौरान निचली अदालत की कार्यवाही छह सप्ताह तक आगे नहीं बढ़ेगी। अब इस मामले की अगली दिशा सर्वोच्च न्यायालय में राहुल गांधी की संभावित याचिका पर निर्भर करेगी।
राहुल गांधी से जुड़े अन्य मामलों में भी हाल के महीनों में सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई है। अगस्त 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ी एक आपराधिक मानहानि कार्यवाही को आवश्यक अनुमति के अभाव में रद्द कर दिया था।
