भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर को कारोबार के दौरान भारी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 789 अंक तक टूटकर 76,156 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 269 अंक गिरकर 23,787 के स्तर तक आ गया। बाद में बाजार में कुछ सुधार हुआ, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक नुकसान में बने रहे।
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान में सैन्य कार्रवाई किए जाने के बाद क्षेत्र में स्थिति फिर गंभीर हो गई है। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 95.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली देखने को मिली। रॉयटर्स के अनुसार प्रमुख 16 क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। छोटी और मझोली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव रहा। तेल विपणन कंपनियों, वाहन कंपनियों, टायर और पेंट क्षेत्र से जुड़े शेयरों में विशेष दबाव देखा गया। विमानन कंपनियों के शेयर भी महंगे ईंधन की चिंता से प्रभावित हुए।
कच्चे तेल के साथ वैश्विक बांड बाजार में बढ़ती प्रतिफल दरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका के कारण उभरते बाजारों से विदेशी निवेश के बाहर जाने का जोखिम बढ़ गया है। इससे भारतीय रुपये पर भी दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ब्याज दरों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
