दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की कीमत बढ़ने के बाद वाहन चालकों के ईंधन खर्च को लेकर चिंता बढ़ गई है। 29 अगस्त से सीएनजी के दाम में 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि लागू हुई है। इसके बाद दिल्ली में सीएनजी की नई कीमत 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर रोजाना वाहन चलाने वाले लोगों के साथ-साथ टैक्सी और ऑटो चालकों पर भी पड़ने की संभावना है।
दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में लोग निजी और व्यावसायिक वाहनों के लिए सीएनजी का इस्तेमाल करते हैं। पेट्रोल और डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत कम लागत के कारण लंबे समय से सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता दी जाती रही है। ऐसे में सीएनजी की कीमत बढ़ने से वाहन मालिकों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ने की संभावना है जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। कार्यालय आने-जाने वाले कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों और नियमित रूप से वाहन इस्तेमाल करने वाले परिवारों को अब ईंधन के लिए पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है। वहीं, टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए बढ़ती ईंधन लागत सीधे उनकी कमाई को प्रभावित कर सकती है।
व्यावसायिक वाहन चालकों का कहना है कि ईंधन की कीमत बढ़ने के साथ वाहन के रखरखाव, बीमा और अन्य खर्च भी लगातार बने हुए हैं। ऐसे में अतिरिक्त ईंधन खर्च को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि परिचालन लागत लंबे समय तक बढ़ी रहती है तो इसका असर परिवहन सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
सीएनजी की कीमत में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन की लागत बढ़ने पर विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के उपभोक्ताओं की नजर ईंधन कीमतों में अगले बदलाव पर है। वाहन चालक अपने खर्च को नियंत्रित करने के लिए यात्रा की योजना बनाने और अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने जैसे उपाय अपना सकते हैं। सीएनजी की नई दर ने एक बार फिर राजधानी में परिवहन लागत और घरेलू बजट पर दबाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
