भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को आने वाले समय में बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वैश्विक कंपनियों के भारत में उत्पादन केंद्र स्थापित करने की बढ़ती रुचि और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के बीच देश में इलेक्ट्रॉनिक्स तथा अर्धचालक उद्योग का विस्तार तेज हो रहा है। इसी कड़ी में ताइवान की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनी फॉक्सकॉन गुजरात में 200 एकड़ से अधिक जमीन की तलाश कर रही है। कंपनी ने अहमदाबाद जिले के साणंद के पास एक संभावित भूखंड का सर्वेक्षण भी किया है। हालांकि अंतिम स्थान और निवेश का निर्णय अभी होना बाकी है।
फॉक्सकॉन की प्रस्तावित परियोजना को भारत के उच्चस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी मोबाइल फोन के साथ अन्य उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी पार्क और विनिर्माण केंद्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। गुजरात सरकार ने परियोजना आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता देने की पेशकश की है।
भारत सरकार भी इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार योजनाएं लागू कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना के तहत अगस्त में 31 और प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इससे कुल स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या 106 हो गई है। इन परियोजनाओं से लगभग 69,548 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 75 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
गुजरात इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रस्तावित अर्धचालक इकाई के लिए 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष आर्थिक क्षेत्र को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना में करीब 91 हजार करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 21 हजार रोजगार की संभावना बताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे निवेश से केवल बड़े कारखानों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि उनके आसपास छोटे और मध्यम आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन, भंडारण और तकनीकी सेवाओं का भी विस्तार होगा। इससे भारत की आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और युवाओं के लिए तकनीकी रोजगार बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर आगे बढ़ती हैं, तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के प्रमुख केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
