भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका तथा नए सदस्य देशों) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुरू होगी। इस बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग को मजबूत करना, विश्वसनीय आंकड़ों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और आधुनिक डेटा प्रबंधन प्रणाली पर विचार-विमर्श करना है। इस आयोजन में विभिन्न सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सांख्यिकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता भाग लेंगे।
बैठक के दौरान आधिकारिक आंकड़ों की गुणवत्ता, डेटा संग्रह की नई तकनीकों, डिजिटल सांख्यिकी प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण, जनगणना, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की निगरानी तथा आर्थिक और सामाजिक संकेतकों के बेहतर मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ इस बात पर भी विचार करेंगे कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में विश्वसनीय और समयबद्ध आंकड़े नीति निर्माण को किस प्रकार अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
भारत इस बैठक के माध्यम से डेटा आधारित सुशासन, डिजिटल नवाचार और पारदर्शी सांख्यिकीय व्यवस्था के क्षेत्र में अपने अनुभव सदस्य देशों के साथ साझा करेगा। बैठक में सांख्यिकी के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही सदस्य देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग के लिए साझा कार्ययोजना तैयार किए जाने की भी संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में विश्वसनीय आंकड़े किसी भी देश की आर्थिक योजना, सामाजिक विकास और निवेश संबंधी निर्णयों का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग बढ़ने से नीति निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होगा और विकास संबंधी चुनौतियों का बेहतर समाधान खोजने में मदद मिलेगी।
बैठक के समापन पर संयुक्त निष्कर्ष और भविष्य की सहयोग रणनीति पर आधारित एक साझा वक्तव्य जारी किए जाने की संभावना है। भारत की मेजबानी में आयोजित यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के बीच संस्थागत सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर सांख्यिकीय प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
