देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने लगभग ₹84,000 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत समुद्र में स्थित अपतटीय (ऑफशोर) तेल और प्राकृतिक गैस परियोजनाओं के विकास को गति दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से भारत की आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
योजना के अंतर्गत अपतटीय क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज, उत्पादन, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य समुद्र में उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों का अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे तेल और गैस उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार होगा। साथ ही जहाज निर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सेवाओं जैसे संबंधित क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाना समय की आवश्यकता है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात से पूरा करता है। यदि अपतटीय परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी अपेक्षाकृत कम पड़ेगा।
योजना में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी परियोजनाओं में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जाए।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, ₹84,000 करोड़ की यह योजना भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।
