कॉमनवेल्थ खेल 2026 में भारत को पहला पदक दिलाते हुए पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन किया और पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने प्रतियोगिता में अपना पदक खाता खोला। झंडू कुमार का यह प्रदर्शन इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने कठिन परिस्थितियों और लंबे संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया।
बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू कुमार बचपन से ही पोलियो से प्रभावित रहे हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने खेलों में अपना करियर बनाया। शुरुआत में उन्होंने शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में हाथ आजमाया, लेकिन बाद में पैरा पावरलिफ्टिंग को अपना मुख्य खेल बनाया। लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई।
कॉमनवेल्थ खेलों के फाइनल मुकाबले में झंडू कुमार ने अपने दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम भार सफलतापूर्वक उठाकर कांस्य पदक सुनिश्चित किया। कुछ समय तक वह स्वर्ण पदक की दौड़ में भी बने रहे, लेकिन अंतिम चरण में अन्य खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन के कारण उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। उनके कोच ने बाद में बताया कि स्वर्ण पदक की संभावना थी, लेकिन अंतिम प्रयासों के दौरान हुई एक छोटी रणनीतिक चूक के कारण वह शीर्ष स्थान से चूक गए।
झंडू कुमार की इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री, खेल जगत और देशभर के खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी है। उनकी सफलता को भारतीय पैरा खेलों के लिए बड़ी प्रेरणा माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इस पदक से भारतीय दल का मनोबल बढ़ेगा और आगामी प्रतियोगिताओं में अन्य खिलाड़ी भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। अब देश की नजरें मुक्केबाजी, तैराकी, जिम्नास्टिक और अन्य स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जहां भारत को और पदकों की उम्मीद है।
