भारत जून माह में रूस से कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार देशों में शामिल रहा है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी नई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि भारत ने अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रूसी कच्चे तेल का आयात बड़े स्तर पर जारी रखा। विशेषज्ञों के अनुसार, देश की मजबूत ऊर्जा मांग और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण रूस से होने वाले तेल आयात में निरंतर स्थिरता बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने घरेलू ईंधन की मांग को पूरा करने और लागत को संतुलित रखने के उद्देश्य से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा। इसके साथ ही पश्चिम एशिया, अफ्रीका और अन्य देशों से भी तेल आयात जारी रहा, जिससे भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध स्रोतों के माध्यम से संतुलित बनाए रखा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी आवश्यकता का अधिकांश हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों, कीमतों और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों से कच्चे तेल की खरीद करती हैं। इससे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा से बचने में मदद मिलती है।
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियों और तेल उत्पादक क्षेत्रों में होने वाले घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर लगातार पड़ रहा है। इसके बावजूद भारत ने अपनी आयात नीति में संतुलन बनाए रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु रखने का प्रयास किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि विविध स्रोतों से आयात की रणनीति भविष्य में भी देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि स्थिर ऊर्जा आपूर्ति उद्योग, परिवहन, बिजली उत्पादन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए अपनी आयात रणनीति को समय-समय पर परिस्थितियों के अनुरूप समायोजित करता रहेगा।
