केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए 100 एथेनॉल फ्यूल स्टेशन शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण में कमी लाना और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इन स्टेशनों पर वाहन चालकों को उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की सुविधा उपलब्ध होगी। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, इसलिए इसका उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। दिल्ली-एनसीआर लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है और ऐसे में यह पहल पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके अलावा एथेनॉल के बढ़ते उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा।
सरकार पहले ही देश में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है और पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। नए फ्यूल स्टेशनों के शुरू होने से उपभोक्ताओं को स्वच्छ ईंधन का अधिक विकल्प मिलेगा और हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य शहरों में भी एथेनॉल फ्यूल स्टेशनों का नेटवर्क विस्तारित किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और कृषि क्षेत्र को एक साथ लाभ मिलने की उम्मीद है।
