सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग कैदियों के मानवीय अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया और एक उच्च स्तरीय समिति को चार महीने में कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया।
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है, जबकि 21 जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से जुड़ा है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने एक याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें देशभर की जेलों में बंद दिव्यांग कैदियों के अधिकारों, हिरासत की स्थितियों और संस्थागत सुरक्षा उपायों से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।

