सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की मुफ्त योजनाओं पर कड़ी टिप्पणी की है, जिससे आर्थिक विकास बाधित होने और राज्यों के कर्ज में डूबने की चिंता जताई गई है। न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी फिजूलखर्ची से वास्तविक विकास के लिए धन की कमी होगी। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, इन योजनाओं पर भारी खर्च हो रहा है, जिससे कई राज्य राजस्व घाटे में हैं और कर्ज लेकर उपभोग वित्तपोषित कर रहे हैं।

मुफ्त की योजनाओं के बढ़ते चलन पर बड़े-बड़े अर्थशास्त्री चिंता जाहिर कर चुके हैं। क्या आप जानते हैं ऐसी तमाम मुफ्त की योजनाओं से सरकार का कितना पैसा खर्च होता है और इससे कितनी हानि होती है। चलिए आपको बताते हैं इनसे जुड़े आंकड़े…
