नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालिया व्यापार समझौते अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि देश एक दशक पहले कहां खड़ा था।
पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उसके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत व्यापार वार्ताओं में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका और एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।

तीन शीर्ष प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री ने पीटीआई से एक साक्षात्कार में ट्रेड डील, आम बजट, रक्षा सुधार, विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका से लेकर अगले तीन दशकों के लिए अपनी तीन शीर्ष प्राथमिकताएं भी गिनाईं। मोदी ने कहा कि भारत ने आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ईयू और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे एमएसएमई के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।
कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था
पिछली संप्रग सरकार ने अपने शासनकाल में कुछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा अनिश्चितता और अस्थिरता से भरी रही। मुख्यत: उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती थी और कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।
सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान किया, आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला।
