दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। 29 अक्टूबर की सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 227 दर्ज किया गया, जबकि उत्तम नगर में यह बढ़कर 340 तक पहुंच गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली के कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक है। अक्टूबर के अंतिम दिनों में मौसम में बदलाव और प्रदूषक तत्वों के हवा में जमा होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 से 300 के बीच होने पर हवा को खराब श्रेणी में रखा जाता है, जबकि 301 से 400 के बीच का स्तर बेहद खराब श्रेणी में आता है। इस आधार पर उत्तम नगर में दर्ज 340 का एक्यूआई बेहद खराब स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है।
प्रदूषण बढ़ने से स्वास्थ्य पर असर की आशंका
खराब हवा के संपर्क में आने से आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अधिक प्रदूषण वाले इलाकों में लंबे समय तक बाहर रहने से बचना उचित है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए प्रदूषण के स्तर को देखते हुए बाहरी गतिविधियों की योजना बनाना महत्वपूर्ण है।
प्रदूषण से निपटने के लिए जरूरी कदम
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों की नियमित सफाई, धूल पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन और वाहनों से निकलने वाले धुएं की निगरानी जरूरी है। नागरिक भी निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करके और कचरा जलाने से बचकर प्रदूषण घटाने में योगदान दे सकते हैं।
लोगों को सलाह दी जाती है कि बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का ताजा एक्यूआई जांचें। प्रदूषण बढ़ने पर अनावश्यक बाहरी गतिविधियां सीमित रखें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
