भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री ने तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के कार्यभार को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि बुमराह को 2027 में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप तक तीनों प्रारूपों में लगातार नहीं खिलाना चाहिए। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देने और एकदिवसीय तथा टी20 मुकाबलों में उनका चयन सीमित रखने का सुझाव दिया है।
बुमराह भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण तेज गेंदबाजों में शामिल हैं। उनकी सटीक यॉर्कर, तेज गति और दबाव के समय विकेट लेने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में पीठ की परेशानी और अन्य चोटों के कारण उनके कार्यभार को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत महसूस की गई है। वर्ष 2023 में उनकी पीठ की सर्जरी भी हुई थी।
रवि शास्त्री के अनुसार, बुमराह को सभी प्रारूपों में लगातार खेलने के बजाय चुनिंदा मुकाबलों में उतारना अधिक उपयोगी हो सकता है। इससे उनकी फिटनेस बनाए रखने और महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं के लिए उन्हें तैयार रखने में मदद मिल सकती है। शास्त्री ने विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट के लिए बुमराह को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है।
भारतीय टीम को आगामी समय में न्यूजीलैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले खेलने हैं। बुमराह को न्यूजीलैंड दौरे की टेस्ट टीम में शामिल किया गया है, जबकि उनसे पहले होने वाली एकदिवसीय और टी20 श्रृंखलाओं के लिए उनका चयन नहीं किया गया है। यह फैसला भी उनके कार्यभार के प्रबंधन की रणनीति से जुड़ा माना जा रहा है।
वर्ष 2027 का एकदिवसीय विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में आयोजित होना है। ऐसे में भारतीय टीम के लिए अपने प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
बुमराह की उपलब्धता भारत की गेंदबाजी की मजबूती के लिए अहम है। यदि टीम प्रबंधन उनके कार्यभार का सही तरीके से प्रबंधन करता है, तो बड़े मुकाबलों में उनकी सेवाओं का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला खिलाड़ी की फिटनेस, टीम की जरूरतों और चयनकर्ताओं की रणनीति पर निर्भर करेगा।
