नई दिल्ली। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 16 अक्टूबर को सुनाया गया। मामला दयालपुर क्षेत्र में हुई हिंसा और आगजनी से संबंधित है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने ताहिर हुसैन को दंगा करने के लिए उकसाने में सहायता देने का दोषी माना। यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत सुनाई गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रभावशाली पद पर रहने वाले व्यक्ति से तनावपूर्ण परिस्थितियों में हिंसा रोकने और शांति बनाए रखने में मदद करने की अपेक्षा की जाती है।
मामले की शिकायत के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को दयालपुर इलाके में एक दुकान में लूटपाट और आगजनी हुई थी। शिकायतकर्ता ने संपत्ति और सामान को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में ताहिर हुसैन की भूमिका को लेकर दलीलें पेश कीं। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद उन्हें इस अपराध में दोषी ठहराया।
इस मामले में अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था। ताहिर हुसैन को इससे पहले दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है और उस मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली है। दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था। ताहिर हुसैन से जुड़े इस फैसले को दंगा मामलों की न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
