शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन 17 अक्टूबर को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, साहस, स्वास्थ्य तथा संकटों से मुक्ति की कामना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना भय और नकारात्मकता को दूर करने वाली मानी जाती है।
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है। देवी का यह स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मां कालरात्रि को अंधकार और दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। उनका स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता हो, लेकिन भक्तों के लिए वे शुभ फल देने वाली माता मानी जाती हैं। इसी कारण उन्हें शुभंकरी नाम से भी जाना जाता है।
पूजा के दौरान श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और विधि-विधान से मां की आराधना करते हैं। मंदिरों में दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप, आरती और भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भक्त माता को फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
मान्यता है कि मां कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यह दिन लोगों को साहस, धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश भी देता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। सप्तमी के बाद अष्टमी और नवमी पर भी विशेष अनुष्ठान होते हैं। इन दिनों भक्त व्रत रखते हैं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि का पर्व देशभर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
