दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्यालयों में घर से काम की व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है। प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित करने की योजना पर चर्चा चल रही है। प्रस्ताव के अनुसार आगामी 1 नवंबर से कार्यालयों में करीब 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
सर्दियों के महीनों में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता अक्सर खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंच जाती है। इस दौरान वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रहते हैं। ऐसे में कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या कम करने से सड़कों पर निजी वाहनों की आवाजाही घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
घर से काम की व्यवस्था लागू होने पर कार्यालयों में प्रतिदिन उपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की संख्या कम हो सकती है। इससे सुबह और शाम के व्यस्त समय में यातायात का दबाव घटाने तथा वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, सभी कार्यालयों और कर्मचारियों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू करना व्यावहारिक होगा या नहीं, इस पर भी विचार किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार की शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना में वायु गुणवत्ता की निगरानी, सड़क की सफाई, धूल नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है। घर से काम की व्यवस्था को इसी व्यापक योजना का एक हिस्सा माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार अंतिम निर्णय वायु गुणवत्ता की स्थिति और संबंधित विभागों की समीक्षा के आधार पर लिया जा सकता है। यदि नवंबर से प्रदूषण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है, तो कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित करने का कदम राजधानी की हवा और यातायात दोनों पर दबाव कम करने में मददगार हो सकता है।
