नई दिल्ली: देश में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं पर शहरी परिवारों का खर्च ग्रामीण परिवारों की तुलना में अधिक सामने आया है। राष्ट्रीय घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी यात्रा के दौरान शहरी परिवारों ने प्रति यात्रा औसतन 41,649 रुपये खर्च किए। वहीं, ग्रामीण परिवारों का औसत खर्च 29,454 रुपये रहा।
सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि इलाज या चिकित्सा संबंधी जरूरतों के लिए यात्रा करने वाले परिवारों को कई तरह के खर्च का सामना करना पड़ता है। इनमें अस्पताल या चिकित्सा संस्थान तक पहुंचने का परिवहन खर्च, रहने की व्यवस्था, भोजन तथा उपचार से जुड़े अन्य खर्च शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग परिवारों का वास्तविक खर्च बीमारी, उपचार की अवधि, अस्पताल के प्रकार और यात्रा की दूरी के आधार पर अलग हो सकता है।
शहरी और ग्रामीण परिवारों के बीच खर्च में अंतर के कई कारण हो सकते हैं। बड़े शहरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और बड़े अस्पतालों की उपलब्धता अधिक होने के कारण दूसरे शहरों से मरीजों की आवाजाही होती है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों को कई बार इलाज के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है।
चिकित्सा यात्रा का खर्च परिवारों के कुल घरेलू बजट पर भी प्रभाव डाल सकता है। खासतौर पर लंबे उपचार, बार-बार अस्पताल जाने या दूर की यात्रा की स्थिति में परिवहन और ठहरने का खर्च बढ़ सकता है।
सर्वेक्षण में सामने आए ये आंकड़े स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और क्षेत्रीय असमानता को समझने के लिए उपयोगी हैं। यदि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों, तो मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
हालांकि, केवल औसत खर्च के आधार पर स्वास्थ्य व्यवस्था का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उपचार की प्रकृति और परिवारों की आर्थिक स्थिति जैसे अन्य कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
