नई दिल्ली: ब्रिक्स देशों की बैठक में नई दिल्ली घोषणा को सदस्य देशों की सहमति से स्वीकार किए जाने की खबर सामने आई है। घोषणा को समूह के बीच सहयोग बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर सामने आ रही विभिन्न चुनौतियों पर साझा रुख विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। इसमें आर्थिक सहयोग, विकास, बहुपक्षीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय की बात सामने आई है।
ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा विस्तार के बाद कई अन्य देश भी शामिल हैं। समूह का दायरा बढ़ने के साथ इसके सामने अलग-अलग देशों के हितों के बीच समन्वय बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ी है। नई दिल्ली घोषणा में साझा हितों वाले विषयों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
घोषणा में वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी महत्व दिया गया है। सदस्य देश व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग और विकास से संबंधित क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करते रहे हैं। विकासशील देशों की आर्थिक जरूरतों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार जैसे विषय भी ब्रिक्स के एजेंडे में शामिल रहे हैं।
इसके अलावा वैश्विक शांति, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े विषयों पर भी सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श हुआ। जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा तथा तकनीकी विकास जैसी चुनौतियां भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करती हैं। घोषणा में इन क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया गया है।
नई दिल्ली घोषणा को स्वीकार किए जाने से ब्रिक्स के भीतर विभिन्न मुद्दों पर आगे की बातचीत के लिए आधार तैयार होने की उम्मीद है। हालांकि, घोषणा में शामिल सहमति को व्यावहारिक नीतियों और संयुक्त परियोजनाओं में बदलना सदस्य देशों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति से इस घोषणा के प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
