नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कला और रंगमंच प्रेमियों के लिए दस दिवसीय रंगमंच उत्सव की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है। इंडिया हैबिटैट सेंटर की ओर से आयोजित आईएचसी रंगमंच महोत्सव 18 से 27 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान स्टीन सभागार और द थिएटर में अलग-अलग भाषाओं और शैलियों के नाटकों का मंचन किया जाएगा। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार महोत्सव में हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी और तमिल भाषा की प्रस्तुतियां शामिल हैं।
महोत्सव की शुरुआत 18 सितंबर को शाम सात बजे अंग्रेजी नाटक ‘डांसिंग विद डैड’ से होगी। इसके बाद 19 सितंबर को ‘ब्रेस्ट ऑफ लक’ का मंचन किया जाएगा, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है। 20 सितंबर को ‘अंब दा बूटा’ के माध्यम से हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषाओं का रंगमंचीय मेल देखने को मिलेगा।
कार्यक्रम में 22 सितंबर को ‘द ट्रेजडी ऑफ हैम मैकलेयर’, 23 सितंबर को ‘विंडो तक आशिकी’ और 24 सितंबर को तमिल नाटक ‘सिलप्पाटिकरम/द एंकलेट्स वर्डिक्ट’ प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद 25 सितंबर को ‘हर मर्ज की दवा’ और 26 सितंबर को अंग्रेजी नाटक ‘द क्वीन’ का मंचन होगा। महोत्सव का समापन 27 सितंबर को ‘भस्भरतम’ की प्रस्तुति के साथ होगा।
महोत्सव के दौरान छोटे सभागार में भी विशेष प्रस्तुतियां रखी गई हैं। इनमें ‘माए नी मेरी अख लग गई’, ‘होम इन अ सूटकेस’ और ‘हिंदी मीडियम टाइट’ शामिल हैं। कुछ प्रस्तुतियों के लिए पहले से पंजीकरण आवश्यक है।
आयोजकों के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य दर्शकों को विभिन्न भाषाओं और रंगमंचीय शैलियों से परिचित कराना है। कार्यक्रम के लिए टिकट 200, 350 और 500 रुपये की श्रेणियों में उपलब्ध हैं। सभी प्रस्तुतियों के लिए समय पर पहुंचने की सलाह दी गई है, क्योंकि देर से प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
