फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित प्रसिद्ध एफिल टावर में बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को लेकर उठे विवाद के बाद बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) ने खेद जताते हुए माफी मांगी है। विवाद उस समय सामने आया, जब आरोप लगा कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल से हटने और पुरुष कर्मचारियों को उनकी जगह तैनात करने के निर्देश दिए गए थे। इस घटना के बाद एफिल टावर के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया और एक दिन के लिए प्रसिद्ध स्मारक को बंद करना पड़ा।
बीएपीएस ने अपने बयान में कहा कि उसका उद्देश्य किसी कर्मचारी के साथ भेदभाव करना नहीं था। संस्था के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल की संख्या बड़ी होने के कारण आम पर्यटकों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए दौरे का समय सुबह निर्धारित किया गया था। संगठन ने यह भी कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार किसी व्यक्ति को एफिल टावर में प्रवेश से रोका नहीं गया था। हालांकि, पूरे घटनाक्रम से यदि किसी को ठेस पहुंची या असुविधा हुई तो संस्था ने उसके लिए ईमानदारी से माफी मांगी।
विवाद के बाद एफिल टावर का संचालन करने वाली संस्था एसईटीई ने भी माना कि महिला कर्मचारियों के साथ बातचीत सीमित रखने जैसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। कर्मचारियों के विरोध के बाद प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बैठक हुई, जिसके बाद एफिल टावर को दोबारा खोल दिया गया। मामले की जांच पेरिस प्रशासन की ओर से भी की जा रही है।
इस घटनाक्रम ने फ्रांस में लैंगिक समानता और कार्यस्थल पर भेदभाव के मुद्दे को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। कई राजनीतिक नेताओं और कर्मचारी संगठनों ने महिला कर्मचारियों को उनकी लिंग पहचान के आधार पर अलग करने के कथित निर्देशों की आलोचना की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों और कार्यस्थलों में समानता के सिद्धांतों का पालन होना चाहिए।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस विवाद से दूरी बनाते हुए कहा है कि एफिल टावर से जुड़ा यह मामला संबंधित पक्षों के बीच का विषय है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार इस मामले में किसी पक्ष के रूप में शामिल नहीं है।
फिलहाल जांच जारी है और बीएपीएस की माफी के बाद विवाद को शांत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। घटना ने धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक संस्थानों में समानता, सम्मान तथा कार्यस्थल के नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
