दिल्ली-एनसीआर में ऑटो और टैक्सी चालकों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। विभिन्न चालक संगठनों ने सात और आठ सितंबर को दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है। चालकों का कहना है कि लंबे समय से उनकी कई मांगों पर सरकार और संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसके चलते उन्होंने दो दिनों तक अपनी सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया है।
चालक संगठनों के अनुसार, बढ़ती सीएनजी कीमत, परिचालन खर्च और वाहनों के रखरखाव पर होने वाला खर्च उनकी आय पर सीधा असर डाल रहा है। उनका कहना है कि ईंधन और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि यात्रियों से मिलने वाला किराया उसी अनुपात में नहीं बढ़ा है। ऐसे में कई चालकों के लिए रोजाना वाहन चलाना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
इसके अलावा, चालक संगठनों ने मोबाइल आधारित टैक्सी सेवाओं और ऑनलाइन परिवहन कंपनियों से जुड़े नियमों को लेकर भी अपनी आपत्तियां जताई हैं। उनका आरोप है कि पारंपरिक ऑटो और टैक्सी चालकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन उनकी आर्थिक सुरक्षा और काम करने की परिस्थितियों को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
हड़ताल का सबसे अधिक असर दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर क्षेत्रों में पड़ने की आशंका है। रोजाना काम, विद्यालय, महाविद्यालय और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए ऑटो और टैक्सी पर निर्भर यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। दिल्ली मेट्रो और बसों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ने की संभावना है।
प्रशासन और परिवहन विभाग के सामने अब यात्रियों की सुविधा बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। यदि हड़ताल व्यापक रहती है तो प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और अन्य व्यस्त स्थानों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ सकती है।
चालक संगठनों ने सरकार से बातचीत कर उनकी मांगों का समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए हड़ताल का रास्ता अपनाना जरूरी हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और चालक संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।
