राजधानी दिल्ली में शनिवार, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर विभिन्न विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। विद्यालयों में विशेष प्रार्थना सभाओं, भाषण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, निबंध प्रतियोगिताओं और सम्मान समारोहों का आयोजन किया गया। शिक्षक दिवस हर वर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
दिल्ली के कई विद्यालयों में विद्यार्थियों ने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए विशेष प्रस्तुतियां दीं। कुछ संस्थानों में विद्यार्थियों ने शिक्षकों की भूमिका निभाकर कक्षाएं भी संचालित कीं। इस दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति अपने अनुभव साझा किए और उन्हें शुभकामनाएं दीं। शिक्षकों को पुष्प, शुभकामना पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित करने की परंपरा भी देखने को मिली।
शिक्षक दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा और शिक्षक की भूमिका को समझने का महत्वपूर्ण दिन भी माना जाता है। शिक्षक विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम का ज्ञान देने के साथ-साथ अनुशासन, जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और आत्मविश्वास का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बदलते तकनीकी वातावरण में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
इस वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह भी नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है। इससे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
राजधानी में आयोजित कार्यक्रमों में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और उनके शिक्षा संबंधी विचारों को भी याद किया गया। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे महान दार्शनिक, शिक्षाविद और भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। उनके जन्मदिन को ही भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।
दिल्ली में शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच सम्मान और संवाद के रिश्ते को मजबूत करने का संदेश दिया। विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि एक अच्छे शिक्षक का मार्गदर्शन उनके शैक्षणिक जीवन के साथ-साथ भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
