देशभर में शुक्रवार, 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही देश के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मथुरा-वृंदावन से लेकर द्वारका, दिल्ली, जयपुर और अन्य शहरों तक मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। मंदिरों में मंगला आरती, विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन का आयोजन किया जा रहा है।
जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी कारण भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में निशीथ काल के दौरान विशेष पूजा-अर्चना कर कान्हा के जन्म का उत्सव मनाते हैं। इस वर्ष जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जा रही है।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में सुबह से ही विशेष पूजा और मंगला आरती का आयोजन हुआ। वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ उमड़ी है। मंदिर परिसरों में कृष्ण भजनों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। दिल्ली में भी बिरला मंदिर और इस्कॉन मंदिर सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में जन्मोत्सव के अवसर पर करीब 352 वर्ष पुरानी परंपरा के तहत 21 तोपों की सलामी दी गई। वहीं जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष अभिषेक, आरती और भोग अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिरों में ‘नंद के घर आनंद भयो’ जैसे भजनों और जयकारों की गूंज सुनाई देगी। कई स्थानों पर जन्माष्टमी की झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इस तरह देशभर में जन्माष्टमी आस्था, भक्ति और उत्सव का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
