गुजरात सरकार ने नीट-यूजी परीक्षा को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज किए गए मामलों में राहत देते हुए संबंधित एफआईआर वापस लेने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला उन छात्रों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्होंने परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाई थी। इस निर्णय के बाद राज्य के हजारों छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे मामलों की समीक्षा करने और कानूनी प्रक्रिया के तहत एफआईआर वापस लेने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि यह राहत केवल उन मामलों में लागू होगी, जिनमें विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की गंभीर हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या अन्य गंभीर आपराधिक गतिविधियों के आरोप नहीं हैं। गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विवादों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर पिछले दिनों गुजरात सहित देश के कई हिस्सों में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए थे। इन मामलों को लेकर छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने सरकार से एफआईआर वापस लेने की मांग की थी।
राज्य सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और सरकार छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले मामलों को संवेदनशीलता के साथ देख रही है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर अनावश्यक कानूनी प्रभाव न पड़े।
शिक्षा और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से छात्रों में सकारात्मक संदेश जाएगा और सरकार तथा युवाओं के बीच संवाद को मजबूती मिलेगी। वहीं विपक्ष ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि छात्रों से जुड़े मामलों में सरकार को आगे भी संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। अब संबंधित अदालतों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से एफआईआर वापस लेने की औपचारिक कार्रवाई पूरी की जाएगी।
