राजस्थान पुलिस की एक व्यापक जांच में करीब ₹50 करोड़ के अंतरराज्यीय नशा और हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस संगठित गिरोह के तार पंजाब की कुछ जेलों में बंद अपराधियों से जुड़े पाए गए हैं। पुलिस का दावा है कि जेल के भीतर से मोबाइल फोन और अन्य माध्यमों का उपयोग कर तस्करी के नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था, जबकि बाहरी सदस्य विभिन्न राज्यों में नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की आपूर्ति का काम संभाल रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान कई संदिग्धों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और बैंक लेनदेन के विश्लेषण के आधार पर इस नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह हवाला और अन्य अवैध माध्यमों से धन का लेनदेन करता था तथा अलग-अलग राज्यों में अपने एजेंटों के जरिए तस्करी का कारोबार संचालित करता था। अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
राजस्थान पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ा दिया है। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जेलों के भीतर से गिरोह का संचालन किस प्रकार किया जा रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। यदि किसी सरकारी कर्मचारी या जेल कर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क का संबंध कई राज्यों में सक्रिय संगठित अपराध समूहों से हो सकता है। इसी कारण वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने तक कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नशा और अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले पूरे तंत्र को ध्वस्त करना है। मामले की जांच लगातार जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
