राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस वर्ष अब तक सामान्य से लगभग 37 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे मौसम के बदलते रुख और मानसून की कमजोर गतिविधि को लेकर चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई के दौरान अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण राजधानी के कई हिस्सों में उमस और गर्मी का असर बना रहा। हालांकि विभाग ने अनुमान जताया है कि अगस्त माह में मानसून के अधिक सक्रिय होने की संभावना है, जिससे वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी हवाओं की स्थिति और विभिन्न मौसमी प्रणालियों के अपेक्षित रूप से सक्रिय न होने के कारण दिल्ली में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इसका प्रभाव केवल तापमान पर ही नहीं, बल्कि जलाशयों के जलस्तर, हरित क्षेत्र और वायु गुणवत्ता पर भी देखा जा रहा है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से वातावरण में नमी तो बनी हुई है, लेकिन लोगों को गर्मी और उमस से राहत नहीं मिल सकी है।
भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अगस्त के पहले और दूसरे सप्ताह में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। इस दौरान दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। यदि यह पूर्वानुमान सही रहता है, तो राजधानी में अब तक हुई वर्षा की कमी काफी हद तक कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी बारिश से भूजल स्तर में सुधार होगा, पेयजल स्रोतों को राहत मिलेगी और वायु प्रदूषण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही किसानों और बागवानी क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि अधिक बारिश होने की स्थिति में जलभराव और यातायात बाधित होने जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने, नालों की सफाई सुनिश्चित करने और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग ने नागरिकों से नियमित मौसम अपडेट पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त में मानसून की सक्रियता राजधानी के मौसम को राहत देने के साथ-साथ जल संसाधनों की स्थिति में भी सुधार ला सकती है।
