दिल्ली की रोहिणी जेल से जुड़े कथित रंगदारी मामले की जांच अब और तेज हो गई है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जेल के भीतर से कथित रूप से संचालित रंगदारी नेटवर्क कैसे सक्रिय रहा और इसमें किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं थी।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए कुछ तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर एसीबी ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी है। अधिकारियों से जेल की सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों की निगरानी, संचार व्यवस्था, ड्यूटी रिकॉर्ड तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे। यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जेल के भीतर से कथित रूप से रंगदारी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए मोबाइल फोन या अन्य संचार माध्यमों का उपयोग कैसे हुआ। इसके अलावा जेल परिसर की सुरक्षा प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी और कैदियों की नियमित जांच व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को केवल जांच के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा।
इस घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में आधुनिक निगरानी प्रणाली, मोबाइल जैमर, नियमित तलाशी अभियान और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं।
