उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य के कई पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और मलबा आने के कारण 100 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा है और राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, टिहरी और पौड़ी शामिल हैं। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर पहाड़ियों से मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात बाधित हो गया है। कई जगहों पर छोटे पुल और संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त होने की सूचना है।
लोक निर्माण विभाग, सीमा सड़क संगठन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीमें सड़कों से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि जहां मौसम अनुकूल रहेगा, वहां बंद मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द खोला जाएगा। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त मशीनें और कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमें भी पूरी तरह सक्रिय हैं। अधिकारियों ने नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पर्यटकों और चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की गई है।
प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, पहाड़ी मार्गों पर सावधानी बरतने और केवल आधिकारिक मौसम एवं यातायात परामर्श का पालन करने का अनुरोध किया है। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लगातार बारिश को देखते हुए पूरे राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है और सभी आपातकालीन सेवाओं को चौबीसों घंटे तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
