भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश में बच्चों और किशोरों के बीच तेजी से बढ़ रहे मोटापे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। परिषद का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी बीमारियों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईसीएमआर ने केंद्र और राज्य सरकारों, विद्यालयों तथा अभिभावकों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
आईसीएमआर के अनुसार बच्चों में मोटापे का सबसे बड़ा कारण असंतुलित खानपान, जंक फूड और शर्करा युक्त पेय पदार्थों का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी तथा मोबाइल, कंप्यूटर और टेलीविजन के सामने अधिक समय बिताना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और व्यायाम की कमी ने कम उम्र में ही बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।
परिषद ने विद्यालयों में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने, नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों को अनिवार्य बनाने तथा बच्चों को संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने की सिफारिश की है। साथ ही अभिभावकों से भी आग्रह किया गया है कि वे बच्चों के भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें तथा अत्यधिक तले-भुने और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन को सीमित रखें।
आईसीएमआर ने यह भी सुझाव दिया है कि बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित किया जाए और उन्हें प्रतिदिन कम से कम एक घंटे तक शारीरिक गतिविधियों या खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परिवार, विद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान और सरकार मिलकर इस दिशा में प्रभावी प्रयास करें, तो बच्चों में बढ़ते मोटापे की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। आईसीएमआर ने इस मुद्दे को सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण चुनौती बताते हुए समाज के सभी वर्गों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की है।
