असम की राजधानी गुवाहाटी में आज से ब्रिक्स (BRICS) देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका तथा ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सिंथेटिक ड्रग्स की बढ़ती तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत बनाना है।
हाल के वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ा है। इन नशीले पदार्थों का उत्पादन, तस्करी और वितरण संगठित आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से कई देशों तक पहुंच रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए बैठक में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त अभियानों, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और सीमा पार समन्वय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
बैठक के दौरान साइबर माध्यमों और डार्क वेब के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी, रासायनिक पदार्थों की निगरानी, वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। विशेषज्ञ इस बात पर भी विचार करेंगे कि युवाओं को नशे की लत से बचाने और जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सदस्य देश किस प्रकार मिलकर काम कर सकते हैं।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि मादक पदार्थों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका मानना है कि साझा रणनीति, सूचना साझाकरण और संयुक्त कार्रवाई से तस्करी के नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है।
बैठक के अंत में एक साझा कार्ययोजना तैयार किए जाने की संभावना है, जिसमें सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने और सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ठोस कदमों पर सहमति बनने की उम्मीद है। यह बैठक वैश्विक स्तर पर नशा विरोधी अभियान को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
