नई दिल्ली। दिल्ली में जल की उपलब्धता बढ़ाने और भूजल स्तर में सुधार के लिए निजी और सरकारी दोनों तरह के भवनों में वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाना आवश्यक है। इसके लिए नियम, प्रोत्साहन और दंड का भी प्रविधान है, परंतु जल बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही के कारण इसका सही तरह से अनुपालन नहीं हो रहा है। इसे लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी नाराजगी जता चुका है, बावजूद इस स्थिति में अधिक सुधार नहीं है। निजी आवासीय परिसर तो दूर सभी सरकारी भवनों में भी इसकी व्यवस्था नहीं है।

यही कारण है कि यहां वर्षा का लगभग 85 प्रतिशत पानी नालों में बह जाता है। राजधानी दिल्ली में 100 वर्ग मीटर और इससे बड़े भूखंडों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य है। आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलता है। 100 से 499.99 वर्ग मीटर तक के भूखंड के लिए अधिकतम 25,000 रुपये इससे बड़े भूखंड के लिए 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है। पानी के बिल में 10 प्रतिशत की छूट भी मिलती है।
